तिथि
सूर्योदय पर
शुक्ल द्वितीया
कल 05:11 अपराह्नसे
आज 03:17 अपराह्न
अगला
शुक्ल तृतीया
आरंभ आज 03:17 अपराह्न
तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वैदिक कैलेंडर के अन्य आवश्यक अंगों की जानकारी के साथ आज का पंचांग देखें।
2026 अगस्त 14, शुक्रवार
तिथि
सूर्योदय पर
शुक्ल द्वितीया
कल 05:11 अपराह्नसे
आज 03:17 अपराह्न
अगला
शुक्ल तृतीया
आरंभ आज 03:17 अपराह्न
नक्षत्र
सूर्योदय पर
पूर्वाफाल्गुनी
आज 01:08 पूर्वाह्नसे
आने वाला कल 12:13 पूर्वाह्न
अगला
उत्तराफाल्गुनी
आरंभ आने वाला कल 12:13 पूर्वाह्न
योग
सूर्योदय पर
शिव
आज 05:58 पूर्वाह्नसे
आने वाला कल 03:39 पूर्वाह्न
अगला
सिद्ध
आरंभ आने वाला कल 03:39 पूर्वाह्न
करण
सूर्योदय पर
कौलव
आज 04:10 पूर्वाह्नसे
03:17 अपराह्न
अगला
तैतिल
आरंभ आज 03:17 अपराह्न
वार
शुक्रवार (Shukravara)
शुक्र के अधीन
सद्भाव, सुंदरता और पैसे के लिए शुभ।
शुक्रवार, 14 अगस्त 2026
सूर्योदय
07:28 पूर्वाह्न
सूर्य राशि
कर्क
सूर्यास्त
06:16 अपराह्न
चंद्रोदय
08:23 पूर्वाह्न
चंद्र राशि
सिंह
चंद्रास्त
08:21 अपराह्न
Cape Town, Western Cape, South Africa (Africa/Johannesburg) के लिए आज का पंचांग स्थानीय सूर्योदय (07:28 पूर्वाह्न) और सूर्यास्त (06:16 अपराह्न) के आधार पर गणना किया गया है। ऊपर दी गई तालिका में तिथि, नक्षत्र, योग, करण, और वार Cape Town में भोर के खगोलीय आकाश को दर्शाते हैं—न कि कोई राष्ट्रीय औसत—इसलिए South Africa के किसी अन्य शहर से एक ही तिथि पर अंतर हो सकता है। इस अक्षांश पर गर्मियों में लंबे और सर्दियों में छोटे दिन सूर्योदय के समय को स्पष्ट रूप से बदल देते हैं। चूँकि दैनिक पंचांग स्थानीय भोर पर आधारित होता है, इसलिए सूर्योदय के समय प्रभावी तिथि या नक्षत्र किसी अन्य अक्षांश या देशांतर वाले शहर से भिन्न हो सकता है।
पंचांग (Panchang, Panchangam, या हिंदू कैलेंडर) भारत और विश्व भर के हिंदू समुदायों द्वारा दैनिक गतिविधियों को शुभ समय के अनुसार निर्धारित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला पारंपरिक कैलेंडर है। 'पंचांग' शब्द संस्कृत के 'पंच' (पाँच) और 'अंग' (भाग) से मिलकर बना है। एक विस्तृत पंचांग में इन पाँच अंगों के अतिरिक्त भी कई खगोलीय विवरण होते हैं, परंतु दैनिक उपयोग के लिए सूर्योदय के समय का पंचांग ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। ऊपर दी गई तालिका उसी दैनिक पंचांग का एक स्पष्ट दृश्य प्रदान करती है।
पंचांग का प्रत्येक अंग खगोलीय स्थिति के एक विशिष्ट पहलू को दर्शाता है। ये संयुक्त रूप से बताते हैं कि सूर्य और चंद्रमा अपने चक्र में कहाँ स्थित हैं और ज्योतिषीय दृष्टि से दिन कैसा रहेगा।
तिथि सूर्य और चंद्रमा के मध्य की कोणीय दूरी को दर्शाती है। चंद्र मास को 30 तिथियों में विभाजित किया गया है—अमावस्या से पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष) और पूर्णिमा से अमावस्या (कृष्ण पक्ष)। व्रत, त्योहार और कई मुहूर्त सीधे तौर पर तिथि (जैसे एकादशी, पूर्णिमा) से ही निर्धारित होते हैं।
चंद्रमा जिस तारामंडल या नक्षत्र-खंड में स्थित होता है, उसे नक्षत्र कहते हैं। कुल 27 नक्षत्र होते हैं (प्रत्येक 13°20' का)। नवजात शिशु का नामकरण, कुंडली मिलान, और मुहूर्त चयन में नक्षत्र की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
योग की गणना सूर्य और चंद्रमा के देशांतर (Longitude) के योग से की जाती है। ये संख्या में 27 होते हैं। यद्यपि दैनिक जीवन में इनकी चर्चा कम होती है, परंतु पूर्ण पंचांग और सूक्ष्म मुहूर्त गणना में इनका विशेष महत्व है।
करण एक तिथि का आधा भाग होता है। कुल 11 करण होते हैं जो चंद्र मास में दोहराए जाते हैं। यह पंचांग का एक अत्यंत सूक्ष्म अंग है जो ज्योतिषियों द्वारा सटीक समय-निर्धारण के लिए उपयोग किया जाता है।
वार सप्ताह के सात दिनों को कहते हैं (रविवार से शनिवार)। वैदिक ज्योतिष में प्रत्येक वार का एक स्वामी ग्रह होता है—जैसे रविवार का सूर्य, सोमवार का चंद्र आदि। इसी स्वामी ग्रह के आधार पर शुभ होरा, राहु काल और चौघड़िया का निर्धारण होता है।
पारंपरिक वैदिक दिन मध्यरात्रि (12:00 AM) से नहीं, अपितु स्थानीय भोर (सूर्योदय) से आरंभ होता है। अतः, पंचांग पूरी तरह से स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर करता है। यहाँ स्विस एफेमेरिस (Swiss Ephemeris) और लाहिरी अयनांश (Lahiri Ayanamsa) का उपयोग करके आपके शहर के निर्देशांकों के आधार पर सूर्योदय-सूर्यास्त की गणना की जाती है। शहर या तिथि बदलने पर पंचांग स्वतः उस स्थान की खगोलीय स्थिति के अनुसार अपडेट हो जाता है।
पंचांग यह बताता है कि आज का ज्योतिषीय 'दिन' कैसा है, परंतु यह दिन के प्रत्येक घंटे को शुभ या अशुभ नहीं बताता। दिन के विशिष्ट शुभ/अशुभ प्रहर जानने के लिए लोग शुभ होरा, शुभ चौघड़िया, गौरी पंचांग या राहु काल का अवलोकन करते हैं।