ऊपर दी गई तालिका में आज का राहु काल (Rahu Kaal / Rahukalam) आपके द्वारा चुने गए शहर के लिए दर्शाया गया है—यह राहु ग्रह से जुड़ा एक अशुभ समय है, जिसकी गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर की जाती है। इसमें आपको दिन और (जहाँ लागू हो) रात के राहु काल का स्पष्ट प्रारंभ और समाप्ति समय दिखाई देगा। सटीक समय के लिए अपने वर्तमान स्थान का उपयोग करें; यह तालिका स्वतः अपडेट हो जाती है। चूँकि यह अवधि वास्तविक दिनमान का आठवाँ भाग होती है, इसलिए मौसम और अक्षांश के अनुसार इसकी लंबाई में परिवर्तन होता रहता है。
राहु काल क्या है?
राहु काल (Rahu Kalam, Rahu Kaal, या राहुकाल) वैदिक ज्योतिष में छाया ग्रह 'राहु' से संबंधित एक दैनिक समयावधि है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय के दौरान महत्वपूर्ण नए कार्य—जैसे विवाह, नया व्यापार आरंभ करना, लंबी यात्रा, बड़ी खरीदारी, या शुभ अनुष्ठान—शुरू करने से बचना चाहिए। यह संपूर्ण दिन का प्रतिबंध नहीं है; अर्थात् रोजमर्रा के कार्य, भोजन, नियमित आवागमन, और पहले से चल रहे कार्य इससे प्रभावित नहीं होते। इस पृष्ठ पर दी गई तालिका बताती है कि आज आपके शहर में राहु काल कब आरंभ और समाप्त होगा।
राहु काल की गणना कैसे होती है?
स्थानीय सूर्योदय से स्थानीय सूर्यास्त तक के दिनमान (दिन के प्रकाश की अवधि) को आठ समान भागों में विभाजित किया जाता है। औसतन बारह घंटे के दिन में प्रत्येक भाग लगभग 90 मिनट का होता है, परंतु वास्तविक अवधि मौसम के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है—गर्मियों में लंबी और सर्दियों में छोटी। राहु काल दिन के इन आठ खंडों में से एक है, और यह किस खंड में पड़ेगा, यह सप्ताह के दिन (वार) पर निर्भर करता है। गणना का यह सूत्र सर्वत्र समान रहता है; केवल सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार समय बदलता है।
कौन-सा खंड किस दिन पड़ता है?
सप्ताह का प्रत्येक दिन राहु काल को सूर्योदय से गिने गए एक निश्चित खंड से जोड़ता है। यह कोई स्थिर घड़ी का समय नहीं है, बल्कि खगोलीय स्थिति पर आधारित है।
रविवार और सोमवार
रविवार को राहु काल सूर्यास्त से ठीक पहले वाले आठवें (अंतिम) खंड में आता है। सोमवार को यह सूर्योदय के बाद दूसरे खंड में आता है। दिन की लंबाई के अनुसार इनका सटीक समय प्रतिदिन बदलता रहता है।
मंगलवार से गुरुवार
मंगलवार को सातवें, बुधवार को पाँचवें, और गुरुवार को छठे खंड में राहु काल पड़ता है। ये नियम शास्त्रीय पंचांग पर आधारित हैं और सभी प्रामाणिक कैलेंडरों में समान रूप से लागू होते हैं।
शुक्रवार और शनिवार
शुक्रवार को राहु काल सूर्योदय के बाद तीसरे खंड में, जबकि शनिवार को पहले ही खंड में (सूर्योदय के तुरंत बाद) आता है। शनिवार का राहु काल विशेष ध्यान देने योग्य होता है क्योंकि यह प्रातःकाल ही प्रारंभ हो जाता है।
राहु काल, गुलिक काल और यमगंड
दक्षिण भारतीय पंचांगों में प्रतिदिन तीन विशेष अवधियाँ दर्शाई जाती हैं: राहु काल, यमगंड (Yamagandam), और गुलिक काल (Gulika Kalam)। ये तीनों ही दिन के आठ-भाग विभाजन पर आधारित हैं, परंतु प्रत्येक वार के अनुसार इनके खंड अलग-अलग होते हैं। यह पृष्ठ विशेष रूप से राहु काल पर केंद्रित है। किसी बड़े निर्णय से पूर्व इन तीनों अवधियों का अवलोकन करना उपयोगी सिद्ध होता है, यद्यपि दैनिक जीवन में सर्वाधिक प्राथमिकता राहु काल को दी जाती है।
इस दौरान क्या करें और क्या न करें?
राहु काल को उन कार्यों के लिए एक विराम के रूप में देखना चाहिए जिन्हें सरलता से पलटा नहीं जा सकता—जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर, उत्पाद लॉन्च (Product Launch), तीर्थ यात्रा का आरंभ, या विवाह मुहूर्त तय करना। पहले से चल रहे कार्य, विद्यालय/कार्यालय के कार्य, और सामान्य दिनचर्या बिना किसी बाधा के जारी रखी जा सकती है। नियम और मान्यताएँ पारिवारिक परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या अभी राहु काल चल रहा है?
- ऊपर दी गई तालिका में वह पंक्ति या हाइलाइट की गई अवधि देखें जो आपके शहर के वर्तमान समय से मेल खाती है। यदि आवश्यक हो तो शहर और तिथि बदल कर जाँचें।
- आज राहु काल कितनी अवधि का है?
- यह आज के स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के मध्य दिनमान का आठवाँ भाग है। गर्मियों में उसी स्थान पर यह खंड सर्दियों की तुलना में अधिक लंबा होता है।
- क्या राहु कालम (Rahu Kalam) और राहु काल एक ही हैं?
- हाँ। Kalam और Kaal एक ही अवधि की क्षेत्रीय वर्तनी हैं। Rahu Kalam, Rahu Kaal, और राहुकाल—ये सभी एक ही ज्योतिषीय गणना को दर्शाते हैं।
- क्या राहु काल रात में भी होता है?
- कुछ ज्योतिषीय परंपराएँ सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात्रि को भी समान आठ भागों में बाँटकर रात्रि के राहु काल की गणना करती हैं। यदि तालिका में रात का समय उपलब्ध है, तो वही नियम रात्रि के आधे भाग पर भी लागू होते हैं।
- क्या राहु काल में यात्रा की जा सकती है?
- पहले से चल रही यात्रा और नियमित आवागमन पूर्णतः सुरक्षित माने जाते हैं। परंतु परंपरा के अनुसार, किसी महत्वपूर्ण या जीवन में एक बार होने वाली नई यात्रा का आरंभ इस समयावधि में करने से बचना चाहिए।
- विभिन्न शहरों में राहु काल का समय अलग क्यों होता है?
- सूर्योदय और सूर्यास्त का समय भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदलता है। चूँकि राहु काल इन्हीं दोनों पर आधारित है, इसलिए एक ही तिथि पर अलग-अलग शहरों में इसका समय भिन्न होता है।



